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हमारा बच्चपन – Yaden Bachpan Ki Poem

न उंच नीच का नाटक
न जात पात का झगड़ा
वो पापा के कंधे पे बैठ के मेला जाना
और १ रूपए के चार चोकलेट से खुश हो जाना
वो दिन भी कितना न्यारा था
हमारा बच्चपन कितना प्यारा था

Yade bachpan ki

वो दादी माँ की कहानिया
खेल खेल में नादानियाँ
स्कूल के मास्टर जी को सोते देख करते थे शैतानिया
ना पैसे की टेंशन बस खेल और मस्ती का सहारा था
हमारा बच्चपन कितना प्यारा था

ना प्यार का बुखार था
न show off करने का भूत सवार था
वो दाढ़ी वाले बाबा से डर जाना
और मुझे तो बस वही चाहिए इस बात पे अड़ जाना
न कोई दुश्मन हर कोई अपना यारा था
हमारा बच्चपन कितना प्यारा था

वो बारिश की पानी में नाव चलाना
और बारिश में दोस्तों के साथ नाचना गाना
वो रविवार को शक्तिमान देखने पे खुद को शक्तिमान बताना
हर दिन एक नया उजयारा था
हमारा बच्चपन कितना प्यारा था

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vickyrajstar: